हरिद्वार।
शिक्षक बच्चों के व्यक्तित्व का विकास कर उनमें अच्छे मूल्यों और आदर्शों को विकसित करता है। जो आगे चलकर देश के उत्तम नागरिक बनें। गुरू को शिक्षा से पहले बाल मन को समझना भी जरूरी है। गुरूकुल कांगडी समविश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग के एम0पी0एड0 तथा बी0पी0एड0 प्रशिक्षु शिक्षकों के लिए एक वेबीनार तथा कार्यशाला शिक्षा मे बाल मनोविज्ञान को बेहतर ढंग से समझना जरूरी विषय पर आयोजित की गई। कार्यशाला मे मुख्य वक्ता वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक प्रो0 राकेश कुमार जैन ने छात्रो को बाल मनोविज्ञान को समझाने तथा बच्चों की शिक्षा से जुडी समस्याओं का समाधान मनोविज्ञान की युक्तियों को साझा करते हुये किया। बेबीनार तथा कार्यशाला का शुभारम्भ दीप-प्रज्ज्वलन तथा स्वस्तिवाचन के साथ आरम्भ हुआ। शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग द्वारा आजादी के अमृतकाल मे आयोजित तथा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार एवं राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के तत्वावधान मे शैक्षिक उन्नयन के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया। प्रो0 राकेश कुमार ने कहॉ कि शिक्षकों के कंधों पर बहुत बड़ा दायित्व बच्चों की शिक्षा से जुडा है। बच्चे ही देश के भाग्य निर्माता बन कर देश का गौरव एवं मान-सम्मान बढाते है। कहॉ कि व्यक्ति के मन-मस्तिष्क पर मॉडल का सबसे अधिक प्रभाव पडता है। शोध इस बात की पुष्टि करते है कि मॉडल के प्रभाव से व्यक्ति के स्वभाव एवं कार्य क्षमता पर सीधा प्रभाव पडता है। बाल अवस्था मे गुस्सा, विनम्रता, सहजता, जैसी अनेक प्रेरक घटनाओं का व्यक्ति के स्वभाव के निर्माण मे अहम योगदान होता है। संकायाध्यक्ष, योग एवं शारीरिक शिक्षा प्रो0 सुरेन्द्र ने कहॉ कि उच्च मूल्य एवं संस्कार से जुडे व्यक्तियों द्वारा संचालित शिक्षण संस्थान भारतीय संस्कृति के सम्बर्धन एवं प्रचार-प्रसार कर मानवता की सबसे बडी सेवा कर रहे है। समाज मे मूल्य तथा चारित्रिक गिरावट पर चिन्ता व्यक्त करते हुये गुरूकुलीय परम्परा के अनुरूप जीवन जीने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक डॉ0 शिवकुमार चौहान ने शिक्षा आरम्भ से पूर्व शिक्षा तथा शिक्षा के माहौल को तैयार करने तथा दैनिक आचरण पर ध्यान देने से समाज की अवनति को रोका जा सकता है। यदि शिक्षक योग्य नहीं होंगे तो शिक्षा की प्रक्रिया ठीक तरह से नहीं चल सकेगी। आज शिक्षक का कार्य केवल बच्चों को आकर्षित करना ही नहीं बल्कि बच्चों को समझने के लिए उन्हें बाल मनोविज्ञान का ज्ञान होना भी जरूरी है।
