बहादराबाद।
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में कुलपति प्रोफेसर दिनेश चंद्र शाही कहा विश्वविद्यालय भारतीय परंपराआें की वैज्ञानिक व्याख्याएं प्रस्तुत करने के लिए शोध कार्य को बढ$ावा देगा।
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में स्थापना दिवस समारोह के साथ आज युवा महोत्सव का समापन हुआ। स्थापना दिवस की शुरुआत कुलपति प्रोफेसर दिनेश चंद्र शा ी के निर्देशन में प्रशासनिक भवन में हुए यज्ञ से हुई। इसके बाद युवा महोत्सव का समापन समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम में कुलपति ने कहा कि आज संस्कृत विश्वविद्यालय ने अपनी स्थापना के 18 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। भविष्य में विश्वविद्यालय शोध पर विशेष रूप से ध्यान देगा। वैदिक परंपराआें, भारत के प्राचीन ज्ञान, इतिहास, संस्कृति और समाज सुधार से जुड$े विषयों पर शोध कार्यों को बढ$ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि संस्कृत वांग्मय केवल भारत की ही नहीं, बल्कि विश्व की तमाम समस्याआें के समाधान में सक्षम है। इसके लिए यह आवश्यक है कि भारत की प्राचीन परंपराआें की आधुनिक संदर्भों के साथ वैज्ञानिक व्याख्या की जाए। उन्होंने कहा कि अज्ञान, अन्याय और अभाव ये तीनों दुनिया की सबसे बड$ी समस्याएं हैं। इनका समाधान वैदिक परंपरा और भारतीय चिंतन में मौजूद है। कुलपति ने समलैंगिक विवाह की मांग को भारतीय परिवार परंपरा पर हमला बताया। समारोह की मुख्य वक्ता अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की केंद्रीय मंत्री निधि त्रिपाठी ने कहा कि भारत की दृष्टि सुपर पावर बनने की दृष्टि नहीं है, बल्कि पूरे विश्व का मार्गदर्शन करने की दृष्टि है। उन्होंने अतीत के महानायकों को पहचानने, उन्हें सम्मान देने पर जोर दिया। निधि त्रिपाठी ने कहा मैकाले और मार्क्स की सोच ने भारतीयों के भीतर हीन भावना पैदा की। इस वक्त एक वैश्विक षड्यंत्र भी चल रहा है जो भारतीय युवाआें को भटकाने, देश के भीतर विद्वेष पैदा करने और समान लिंग में शादी करने जैसे विचारों को बढ$ावा दे रहा है। आज की पीढ$ी को इन स्थितियों से जागरूक होने की आवश्यकता है। उन्होंने समलैंगिक विवाह के विचार को भारतीय मूल्यों के विपरीत करार दिया। मुख्य अतिथि दिव्य प्रेम सेवा मिशन के प्रमुख आशीष गौतम ने कहा कि युवा पीढ$ी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंच—प्राण के साथ संबद्ध करना चाहिए। अपनी विरासत के प्रति आत्मगौरव, गुलामी के प्रतीकों को हटाने, एकता—अखंडता को बढ$ावा देने, नागरिक कर्तव्यों का पालन और विकसित भारत के लिए सतत प्रयास करने से ही राष्ट्र दुनिया में विश्व गुरु का स्थान प्राप्त कर सकेगा। उन्होंने दशरथ मांझी का उदाहरण देते हुए अपने संकल्प को द्रढ$ करने पर जोर दिया और कहा कि भारत को विश्व गुरु बनने के लिए गुरुता की साधना करनी होगी। आशीष गौतम ने जी—2 का संदर्भ देते हुए कहा कि विश्व के टिकाऊ विकास और शांति की धाराएं भारत से ही निकलेंगी। गंगा सभा हरिद्वार के अध्यक्ष नितिन गौतम ने इस बात पर जोर दिया कि युवा पीढ$ी अपनी सांस्कृतिक विरासत के मूल स्वरूप को बचा कर रखे।
कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने युवा महोत्सव और विश्वविद्यालय स्थापना दिवस समारोह में युवाआें की सहभागिता को उल्लेखनीय बताते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा। संबोधन के पश्चात विभिन्न प्रतियोगिताआें के विजेताआें को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए। भाषण प्रतियोगिता में चंद्रमोहन, एकलव्य हरितोष, नीरज पंत, शैफलिया आफरीन, स्वरचित कविता में गौरव उनियाल, बृजेश जोशी, सतीश पनेरु , नृत्य में हनी, रितिका, मेधा, शतरंज प्रतियोगिता में धर्मेंद्र, सूरज कोठारी, सागर खेमरिया को पुरस्कृत किया गया। मेहंदी प्रतियोगिता में वर्षा, गायत्री प्रतिभा, रंगोली प्रतियोगिता में गायत्री, शिखा पाल, वर्षा अग्रवाल और योगासन प्रस्तुति में बालक वर्ग में तुशांत, राजन, राजकुमार तथा बालिका वर्ग में गायत्री, शिखा मलिक, रिया सैनी को क्रमश: प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान के लिए पुरस्कृत किया गया।
इस अवसर पर पर्यावरण के शिक्षक डा. विनय सेठी ने अतिथियों को गौरैया संरक्षण अभियान के तहत घोसले भेंट किए। छात्र संघ की आेर से पूर्व अध्यक्षों विवेक ममगाई और अनुपम कोठारी को सम्मानित किया गया। समारोह को भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष विक्रम भुल्लर ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन डा. शैलेश तिवारी ने किया।
