देहरादून। कांग्रेस ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर सवाल उठाए हैं। गुरूवार को उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने नीट पेपर लीक मामले पर केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। मगर बीजेपी की कथनी और करनी में बड़ा फर्क है। एनटीए यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी वह एक एनजीओ है। यह एजेंसी 2017 में बनी है और इसमें तमाम भाजपा और आरएसएस से जुड़े हुए लोग काबिज रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस आर्गेनाइजेशन के माध्यम से लगातार एग्जाम फेल होते चले गए, उस एजेंसी को आखिर किसने ऑथराइज्ड किया है। आलोक शर्मा ने कहा कि इस एजेंसी को किसने ताकत दी कि वह बड़े-बड़े एग्जाम्स करवाये। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को एग्जाम कराने की इजाजत क्या मिनिस्ट्री ऑफ एचआरडी ने दी, या फिर इसकी स्वीकृती पीएमओ या कैबिनेट ने दी है।
उन्होंने कुछ प्रमुख मांगे उठाते हुए कहा है कि उनकी पहली मांग है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को पूरी तरह से खत्म कर देना चाहिए। साथ ही इसका फॉरेंसिक फाइनेंशियल ऑडिट होना चाहिए। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। आलोक शर्मा ने उन्हें फेल शिक्षा मंत्री बताते हुए कहा कि पेपर लीक मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति का गठन होना चाहिए। इसके साथ ही इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के तत्वाधान में सीबीआई करे। यह जांच टाइम बाउंड फ्रेम में होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बच्चों का भविष्य खराब करने में लगी हुई है और यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। अब जनता को भी सोचना होगा कि देश में डॉक्टर बन रहे हैं या नकल करके गलत लोगों को प्रमोट किया जा रहा है। कांग्रेस ने मांग उठाई है कि जिन युवाओं का री एग्जाम होगा, उनका एग्जाम राष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी ना कराये. सीबीएससी, यूपीएससी या अन्य कोई संस्था उस एग्जाम को कराये। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जिन युवाओं ने नीट का एग्जाम दिया और वो फिर से री एग्जाम में बैठेंगे, उन सबको केंद्र सरकार कम से कम 10 हजार रुपये मुआवजे के तौर पर मुहैया कराए।
