-54 करोड की लागत से क्रय की गई थी अनुपयुक्त 35 बीघा भूमि
-एसडीएम ने 3 दिनों में पूरी कर दी थी 14३ की कार्रवाई
– विजिलेंस करेगी जमीन घोटाले की जांच
-वरुण चौधरी के कार्यकाल के दौरान हुए कार्यों का विशेष आडिट कराए जाने के निर्देश
हरिद्वार।
नगर निगम के 54 करोड के जमीन घोटाले में धामी सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मौजूदा जिलाधिकारी कर्मेन्द्र सिंह, पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी और एसडीएम अजयवीर सिंह को सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही वरिष्ठ वित्त अधिकारी व कानूनगों सहित अन्य पर भी गाज गिरी है। जनपद में पहली बार किसी जिलाधिकारी को पद पर रहते हुए सस्पेंड किया गया है। वहीं मामले में अब विजिलेंस जमीन घोटाले की जांच करेगी। साथ ही भूमि खरीद के विक्रय पत्र निरस्त करते हुए, भूस्वामियों को दिए गए धन की रिकवरी के भी निर्देश दिए है। सीएम ने पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी के कार्यकाल के दौरान नगर निगम में हुए सभी कार्यों का विशेष आडिट कराए जाने के भी निर्देश दिए है।
गौरतलब है कि नगर निगम ने सराय गांव में कूड़े के ढेर के पास अनुपयुक्त लगभग 5४ करोड$ की लागत से 35 बीघा भूमि क्रय की थी। यह राशि निगम को हरिद्वार रिंग रोड के निर्माण के दौरान मुआवजे के रूप में प्राप्त हुई थी। खरीदी गई भूमि की तत्काल कोई आवश्यकता नहीं थी और इसकी उपयोगिता भी स्पष्ट नहीं थी। इसके बावजूद नगर निगम ने इसे ऊंचे दामों पर खरीद लिया। मामला प्रकाश में आने पर इसकी प्राथमिक जांच की गई। जिसमें सामने आया कि भूमि का सर्किल रेट उस समय लगभग 60,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर था, जिसके अनुसार इसकी कीमत लगभग 15 करोड$ रुपये होनी चाहिए थी। लेकिन इसे 5४ करोड$ रुपये में खरीदा गया जो कि सामान्य मूल्य से भी तीन गुना अधिक है। इस लेन—देन में टेंडर प्रक्रिया का भी पालन भी नहीं किया गया, जो स्पष्ट रूप से सरकारी खरीद नियमों का उल्लंघन है। जांच में प्रथम दृष्टया अनियमितता पाए जाने पर नगर निगम के प्रभारी सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल, अधिशासी अभियंता आनंद सिंह मिश्रवाण, कर एवं राजस्व अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट और कर्मचारी दिनेश चंद्र कांडपाल को भी सस्पेंड किया गया। साथ ही संपत्ति लिपिक वेदवाल का सेवा विस्तार समाप्त कर दिया गया और उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शासन ने मामले की जांच आईएएस अधिकारी रणवीर सिंह को सौंपी। उन्होंने अपनी जांच के दौरान हरिद्वार के जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह, तत्कालीन नगर आयुक्त आईएएस वरुण चौधरी तथा पीसीएस अधिकारी एसडीएम अजयवीर सिंह से भी पूछताछ की। जांच में सामने आया कि जिस जमीन को खरीदा गया है उसकी प्रक्रिया कृषि भूमि के दामों पर शुरू की गई थी, लेकिन अंत में उसे वाणिज्यिक दरों पर खरीदा गया। इस मामले में लैंड कमिटी भी नहीं बनाई गई। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उप जिलाधिकारी सदर के पद पर रहते हुए पीसीएस अधिकारी अजयवीर सिंह ने मात्र 2 से 3 दिनों में 14३ की पूरी कार्रवाई पूरी कर दी और फाइल को जल्दी निपटाने के लिए अपने स्टेनो को राजस्व अभिमत देने का काम सौंप दिया। यह प्रक्रिया न केवल असामान्य रूप से तेज थी बल्कि नियमों की अनदेखी भी की गई। जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह ने प्रशासनिक प्रमुख होते हुए लैंड पुलिंग कमेटी की अनुमति के बिना ही जमीन की खरीद की अनुमति दे दी। गुरुवार दोपहर को उन्होंने अपनी करीब 10 पेजों की रिपोर्ट सचिव शहरी विकास को सौंपी। रिपोर्ट में ऊंचे दाम में भूमि खरीद, भूमि खरीद की तय प्रक्रिया का अनुपालन न करने और भू उपयोग परिवर्तन को लेकर अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताते हुए उन पर कार्यवाही की संस्तुति की गई। जिसके बाद रिपोर्ट मिलते ही धामी सरकार ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए हरिद्वार के जिलाधिकारी कर्मेन्द्र सिंह, पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी और एसडीएम सदर रहे अजयवीर सिंह (वर्तमान में एसडीएम भगवानपुर) को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही वरिष्ठ वित्त अधिकारी निकिता बिष्ट, कानूनगों राजेश कुमार, तहसील प्रशासनिक अधिकारी कमलदास, और वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक विक्की को भी निलंबित किया गया है। सरकार की कार्रवाई से प्रदेश भर में हड़कंप मच गया। यही नहीं मामले में अब विजिलेंस जमीन घोटाले की जांच करेगी। साथ ही भूमि खरीद के विक्रय पत्र निरस्त करते हुए, भूस्वामियों को दिए गए धन की रिकवरी के भी निर्देश दिए हैं। सीएम ने पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी के कार्यकाल के दौरान नगर निगम में हुए सभी कार्यों का विशेष आडिट कराए जाने के भी निर्देश दिए हैं।
