-लोकपर्व ’फूलदेई’ के स्वागत को तैयार उत्तराखंड
-ब्रह्म बेला में बच्चों की टोली घर-घर देगी दस्तक
-बसन्त आगमन और सुख-समृद्धि का देंगे संदेश
रुद्रप्रयाग। चैत्र मास की संक्रान्ति के साथ ही उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकपर्व ’फूलदेई’ का आगाज होने जा रहा है। इसे लेकर सीमांत क्षेत्रों से लेकर गांव-गांव तक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पहाड़ों में बसन्त के आगमन का प्रतीक यह त्योहार बच्चों और ग्रामीणों के लिए विशेष उत्साह लेकर आया है।
मान्यता के अनुसार, पर्व के दिन नौनिहाल ब्रह्म बेला (तड़के) में उठकर बुरांस, फ्यूंली, आड़ू और अन्य जंगली फूलों को एकत्रित करेंगे। इसके बाद पारंपरिक लोकगीतों के साथ बच्चे गांव के प्रत्येक घर की चौखट पर फूल बिखेरकर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। बदले में गृहस्वामियों की ओर से बच्चों को गुड़, चावल और दक्षिणा देकर आशीर्वाद दिया जाता है।
सांस्कृतिक दृष्टि से यह पर्व प्रकृति और मानव के गहरे संबंध को दर्शाता है। धार्मिक मान्यता से चौखट पर फूल बिखेरना शुभ माना जाता है, जिससे घर में शांति और खुशहाली आती है। यह त्योहार नई पीढ़ी को वनस्पतियों और पर्यावरण के संरक्षण का संदेश देता है।
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प्रमुख आकर्षणः घोंघा नृत्य और सामूहिक भोज
रुद्रप्रयाग। हिमालयन ग्रामीण विकास संस्था के अध्यक्ष डॉ. कैलाश पुष्वाण ने बताया कि फूलदेई में ’घोंघा नृत्य’ मुख्य आकर्षण होता है। इस पर्व का समापन घोंघा विसर्जन और सामूहिक भोज के साथ करने की परंपरा सदियों पुरानी है। वहीं, नगर पंचायत अध्यक्ष कुब्जा धर्म्वाण का कहना है कि यह त्योहार आपसी प्रेम और भाईचारे की भावना को मजबूती प्रदान करता है।
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साहित्य और संगीत में फूलदेई
रुद्रप्रयाग। क्षेत्र की प्रबुद्ध महिलाओं पूर्व प्रधान प्रेमलता पंत, विलोचना रावत और दमयंती भट्ट ने बताया कि उत्तराखंड के गीतकारों और साहित्यकारों ने इस पर्व का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया है। वर्तमान में कई सामाजिक संगठन घोंघा प्रतियोगिताओं के माध्यम से इस लोक परंपरा को विशिष्ट पहचान दिलाने का प्रयास कर रहे हैं।
