हरिद्वार
श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा द्वारा उत्तराखंड के समस्त पौराणिक तीर्थों की यात्रा हेतु पवित्र छड़ी यात्रा आज हर की पौड़ी पर मां गंगा की पूजा अर्चना तथा दुग्ध अभिषेक के पश्चात विधिवत प्रारंभ हो गई है। ज्ञात रहे बीत रोज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने माया देवी मंदिर में पवित्र छड$ी की पूजा अर्चना कर इस पौराणिक छड$ी यात्रा का शुभारंभ कर दिया था।
सोमवार को अखिल भारतीय अखाड$ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा मनसा देवी ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महंत रविंद्र पुरी महाराज तथा जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री हरि गिरि महाराज, अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महंत मोहन भारती, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री महंत केदारपुरी अंतर्राष्ट्रीय सचिव श्री महंत ओम भारती, महामंत्री श्री महंत महेश पुरी, श्री महंत शैलेंद्र गिरी, श्री महंत महाकाल गिरी पवित्र छड$ी के साथ नगर में भ्रमण करते हुए माया देवी मंदिर से हरकी पौड$ी पहुंचे। नागा संन्यासियों के हर-हर महादेव के जय घोष के बीच नागरिकों तथा व्यापारियों व श्रद्धालु भक्तों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। हर की पौड़ी पहुंचने पर श्री गंगा सभा के सभापति नितिन गौतम की अगुवाई में सभा के पदाधिकारी ने पवित्र छड़ी का स्वागत किया तथा पूर्ण षोडशोपचार पूजन विधि के साथ पवित्र छड़ी यात्रा के निर्विघ संपन्न होने की कामना के साथ मां गंगा की पूजा अर्चना कर दुग्धाभिषेक किया। इस अवसर पर श्री महंत हरि गिरि महाराज ने पवित्र छड़ी यात्रा का उद्देश्य बताते हुए कहा की उत्तराखंड की सुख समृद्धि, विकास, सीमावर्ती क्षेत्र के विकास के साथ—साथ इन दुर्गम क्षेत्रों में उच्च शिक्षण संस्थान, सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल स्थापित किए जाने के उद्देश्य से की जा रही है। इन सुविधाओं का विकास होने से जहां क्षेत्र का पलायन रुकेगा वही सीमांतवर्ती क्षेत्र की सीमाओं की सुरक्षा होगी तथा स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। इस छड$ी यात्रा के माध्यम से शासन प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करने तथा जन जागरण किया जाना भी उद्देश्य है। हरकी पौड़ी पर गंगा पूजन के पश्चात पवित्र छड़ी यात्रा अपर रोड, मोती बाजार, बड़ा बाजार होते हुए श्रवण नाथ मठ पहुंची। जहां श्री महंत रवींद्र पुरी महाराज ने पशुपति नाथ महादेव मंदिर में छड़ी पूजन कर जला अभिषेक किया तथा छड़ी यात्रा के उद्देश्य के निर्विघ समापन की कामना की।
अब यह पवित्र छड$ी नगर में विभिन्न मठ मंदिरों तथा पौराणिक तीर्थों का भ्रमण कर 3 अक्टूबर को उत्तराखंड की यात्रा के लिए रवाना हो जाएगी।
